लखनऊ अग्निकांड: लापरवाही की आग में झुलसी 15 जिंदगियां
लखनऊ,अनवारुल हक,संवाददाता,कौटिल्य का भारत
लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनिमेशन कोचिंग सेंटर में हुई भीषण अग्निकांड की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 विद्यार्थियों की मृत्यु हो गई तथा कई अन्य घायल हुए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि भवन सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की गई थी। पुलिस ने छह लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है, जिनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर लखनऊ विकास प्राधिकरण, अग्निशमन विभाग और विद्युत विभाग के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का भयावह परिणाम प्रतीत होती है। जांच में यह भी सामने आया है कि संबंधित भवन को लेकर वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के कारण ध्वस्तीकरण का आदेश जारी हुआ था, लेकिन बाद में उसे निरस्त कर दिया गया। अब वही पुरानी फाइलें और निर्णय जांच के घेरे में हैं।
मुख्यमंत्री ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है और सात दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
कौटिल्य दृष्टि
जब नियम केवल कागजों पर रह जाएं, निरीक्षण केवल औपचारिकता बन जाए और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंद लें, तब ऐसी त्रासदियां जन्म लेती हैं। लखनऊ की यह घटना केवल एक भवन में लगी आग नहीं है; यह व्यवस्था में फैली लापरवाही, भ्रष्टाचार और जवाबदेही के अभाव की ज्वाला है।प्रश्न यह है कि यदि 2016 में अवैध निर्माण चिन्हित हो चुका था, तो 2026 तक उस भवन में विद्यार्थियों का जीवन क्यों दांव पर लगा रहा?
यदि सुरक्षा मानकों का पालन कराया गया होता, तो शायद आज 15 परिवार अपने बच्चों की अर्थी उठाने को विवश न होते।

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