आईजीआरएस समीक्षा बैठक : शिकायत निस्तारण में लापरवाही पर डीएम का सख्त संदेश
बस्ती, वशिष्ठ नगर, संवाददाता
जनपद बस्ती में जिलाधिकारी कृत्तिका ज्योत्स्ना की अध्यक्षता में आयोजित आईजीआरएस समीक्षा बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि शासन की जनउत्तरदायित्व व्यवस्था को मजबूत करने का स्पष्ट संकेत है। बैठक में जिस प्रकार विभागवार शिकायतों, लंबित प्रकरणों और शिकायतकर्ताओं की संतुष्टि की समीक्षा की गयी, उससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन अब केवल “निस्तारण” नहीं बल्कि “संतोषजनक समाधान” को प्राथमिकता दे रहा है।
जिलाधिकारी ने जिस दृढ़ता से कहा कि शिकायतों का समाधान गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए, वह प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव का संकेत है। अक्सर देखा जाता रहा है कि पोर्टल पर शिकायतें केवल औपचारिक टिप्पणियों के साथ बंद कर दी जाती हैं, जबकि वास्तविक समस्या जस की तस बनी रहती है। ऐसे में डीएम का यह निर्देश कि शासन स्तर से फीडबैक लेने पर शिकायतकर्ता संतुष्ट दिखाई दें, प्रशासन को जवाबदेही की कसौटी पर कसने वाला कदम माना जाएगा।
बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष विभागीय जवाबदेही रहा। शिकायतों में अनावश्यक विलम्ब या लापरवाही पर सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी यह दर्शाती है कि अब आईजीआरएस को महज आंकड़ों का खेल नहीं रहने दिया जाएगा। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों पर समयबद्ध कार्य संस्कृति विकसित करने का दबाव बढ़ेगा।
छात्रवृत्ति आवेदनों में आधार फीडिंग के लिए कैम्प लगाने का निर्देश भी प्रशासन की व्यावहारिक सोच को दर्शाता है। यह निर्णय ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए राहतकारी साबित हो सकता है, क्योंकि तकनीकी त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में छात्रवृत्ति आवेदन लंबित रह जाते हैं।
लंबित मुकदमों की समीक्षा और उनके शीघ्र निस्तारण का निर्देश यह संकेत देता है कि जिला प्रशासन केवल शिकायत पोर्टल तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक प्रशासनिक सुधार की दिशा में भी सक्रिय है।
कुल मिलाकर यह बैठक प्रशासनिक सख्ती, जवाबदेही और जनसंतुष्टि आधारित शासन मॉडल की ओर बढ़ता हुआ कदम प्रतीत होती है। यदि निर्देशों का पालन धरातल पर प्रभावी ढंग से हुआ, तो न केवल जनपद की रैंकिंग सुधरेगी बल्कि आम नागरिक का प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होगा।

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