650 बाल कलाकारों ने जीवंत किए श्रीराम के आदर्श, भव्य समारोह में हुआ सम्मान - कौटिल्य का भारत

Breaking News

Home Top Ad

विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9415671117

Post Top Ad

मंगलवार, 19 मई 2026

650 बाल कलाकारों ने जीवंत किए श्रीराम के आदर्श, भव्य समारोह में हुआ सम्मान

 श्रीराम के आदर्शों से संस्कारित हो रही नई पीढ़ी : 650 बाल कलाकारों का हुआ भव्य सम्मान

बस्ती।


 सनातन धर्म संस्था, बस्ती द्वारा आयोजित “श्रीरामलीला महोत्सव बस्ती” के प्रतिभागी बच्चों, प्रशिक्षकों एवं सहयोगी विद्यालयों के सम्मान में अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह, सिविल लाइन में भव्य पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में श्रीरामलीला महोत्सव में भाग लेने वाले लगभग 650 बाल कलाकारों को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया। साथ ही विभिन्न विद्यालयों के प्रशिक्षकों को भी उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।“श्रीरामलीला महोत्सव बस्ती” अपनी तरह का एक अनूठा सांस्कृतिक आयोजन बन चुका है, जिसमें बस्ती मंडल के 20 विद्यालयों के लगभग 650 बच्चे भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित 20 प्रसंगों की रामलीला का मंचन करते हैं। बाल सहभागिता से सजी इस रामलीला को उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति, संस्कार और चरित्र निर्माण का प्रभावी माध्यम बताया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नाथ नगरी बरेली से पधारे प्रख्यात सर्जन, मानस मर्मज्ञ एवं श्रीराम भक्त डॉ. बृजेश यादव रहे। उनके साथ कर्नल के.सी. मिश्र, वयोवृद्ध श्रीराम भक्त जोशी जी, संभल से पधारे क्षेमनाथ तीर्थ के महंत बाल योगी दीनानाथ जी महाराज, डॉ. अश्विनी सिंह सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर एवं भगवान श्रीराम के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सभागार में उपस्थित सैकड़ों बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों एवं अतिथियों ने सामूहिक रूप से श्रीराम स्तुति का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने मंच पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि श्रीरामलीला में अभिनय के माध्यम से उन्हें भगवान श्रीराम के जीवन, त्याग, मर्यादा, आदर्श और कर्तव्यबोध को निकट से समझने का अवसर मिला। बच्चों द्वारा निभाए गए पात्रों और उनसे प्राप्त शिक्षाओं पर व्यक्त विचारों ने पूरे सभागार को भावविभोर कर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. बृजेश यादव ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन हर परिस्थिति में धैर्य, मर्यादा और समभाव बनाए रखने की शिक्षा देता है। उन्होंने कहा कि जिस राजकुमार को अगले दिन युवराज बनने की घोषणा हो चुकी हो और उसी को वनवास का आदेश मिल जाए, फिर भी उसके मन में न हर्ष हो और न विषाद — यह केवल भगवान श्रीराम के चरित्र में ही संभव है। उन्होंने कहा कि राजसी वैभव और सिंहासन छोड़कर भगवान राम जिस सहजता से वन की ओर प्रस्थान करते हैं, वह समूचे मानव समाज को कर्तव्यपथ पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अवसाद, निराशा और आत्महत्या जैसी प्रवृत्तियों से बचने के लिए भगवान श्रीराम के जीवन को समझना आवश्यक है। श्रीराम हमें सिखाते हैं कि परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन धैर्य, कर्तव्य और संस्कार नहीं बदलने चाहिए।

डॉ. यादव ने श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा — “प्रातःकाल उठि कर रघुनाथा, मातु पिता गुरु नावहिं माथा” अर्थात भगवान श्रीराम प्रतिदिन प्रातः उठकर माता-पिता और गुरुजनों का अभिवादन करते थे। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में प्रतिदिन बड़ों का सम्मान करें और भारतीय संस्कारों को आत्मसात करें।उन्होंने “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने स्वर्णमयी लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उनके लिए मातृभूमि सर्वोपरि थी। उन्होंने कहा कि जब जीवन में राम जैसा आचरण आएगा, तब क्रोध, अहंकार और नकारात्मक प्रवृत्तियाँ स्वतः समाप्त हो जाएँगी।इस अवसर पर सनातन धर्म संस्था द्वारा बरेली से आए लगभग बीस श्रीराम भक्तों का भी अभिनंदन किया गया। समारोह में बच्चों को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार वितरित किए गए।

अतिथियों का स्वागत भाषण कैलाशनाथ दुबे ने किया, जबकि कर्नल के.सी. मिश्र एवं अखिलेश दूबे ने कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यालयों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे, जिनमें डॉ. आलोक पाण्डेय, एम.पी. दुबे, सत्य प्रकाश सिंह, डॉ. शैलेश सिंह, मनीष सिंह, अर्पित गौड़, पूजा, मान्यता, डॉ. देवानंद सिंह, अंकुर यादव, भोलानाथ चौधरी, ओमकार मिश्र, डॉ. डी.के. गुप्ता, राजेश मिश्र, संतोष श्रीवास्तव, बबलू मेहदी, सुनील शुक्ल, अनुराग शुक्ल, पंकज त्रिपाठी, सुनील सिंह, हरिश त्रिपाठी एवं सुनील यादव सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

समारोह के अंत में संस्था पदाधिकारियों ने भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों एवं भगवान श्रीराम के आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Post Bottom Ad