शिक्षा पर ‘नीतियों का प्रहार’ या ‘सुधार’ का भ्रम? यूजीसी के खिलाफ सड़कों पर उतरी मेधा
“बंद हो शिक्षा का बाजारीकरण, नहीं तो उग्र होगा आंदोलन”
कौटिल्य का भारत संवाददाता
बस्ती। शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर simmer कर रहा असंतोष अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। बुधवार को बस्ती में बापू प्रतिमा के समक्ष मेधा संगठन ने जोरदार धरना प्रदर्शन कर यूजीसी की नई नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मेधा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीन दयाल त्रिपाठी ने सरकार और यूजीसी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “शिक्षा को बाजार की वस्तु बनाने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”धरने के दौरान छात्रों और युवाओं में गहरी बेचैनी साफ झलक रही थी। दीन दयाल त्रिपाठी ने कहा कि भले ही सर्वोच्च न्यायालय ने यूजीसी के नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी हो, लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल अब भी बरकरार हैं। “जब तक स्पष्ट और पारदर्शी स्पष्टीकरण नहीं आता, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है,” उन्होंने चेतावनी दी।
उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी की नीतियां न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को कमजोर कर रही हैं, बल्कि समान अवसर की अवधारणा को भी चोट पहुँचा रही हैं। “आज शिक्षा व्यवस्था एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां प्रतिभा से ज्यादा पैसे की ताकत हावी होती जा रही है। यह देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है,” त्रिपाठी ने आक्रामक लहजे में कहा।धरने में उठी सबसे तीखी मांगों में से एक थी—सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में सवर्ण वर्ग को भी अन्य वर्गों की तरह अवसर मिलना चाहिए, ताकि प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष और संतुलित हो सके। “यह लड़ाई किसी एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे समाज के न्याय और संतुलन की है,” मंच से ऐलान किया गया।
मेधा संगठन ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि एक लंबी लड़ाई की शुरुआत है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते नीतियों में सुधार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक व उग्र रूप दिया जाएगा।धरने में प्रशांत पाण्डेय, रामरीका पाण्डेय, राहुल त्रिपाठी, प्रतीक मिश्र, गिरीश चन्द्र गिरी, अंकित पाण्डेय, अमरनाथ यादव, विपुल सिंह, पद्युम्न उपाध्याय, उमेश उपाध्याय ‘गग्गर’ सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।सवाल बड़ा है—क्या शिक्षा व्यवस्था सच में सुधार की ओर बढ़ रही है, या फिर बाजार के हवाले होती जा रही है?

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