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बुधवार, 15 अप्रैल 2026

श्मशान बनते बस्ती के प्रसव केंद्र, सिस्टम की भी हत्या

  “बस्ती में जन्मा नहीं—काट दिया गया जीवन!” 

 जनपद बस्ती (उत्तर प्रदेश)


बस्ती : उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से चिकित्सा जगत को दहला देने वाली एक घटना सामने आई है. यहां सरकारी अस्पताल के स्टाफ की संवेदनहीनता और लापरवाही ने न केवल एक नवजात की जान ले ली, बल्कि एक प्रसूता को भी मौत के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया. प्रसव के दौरान की गई एक तकनीकी भूल और अमानवीय व्यवहार के कारण नवजात का धड़ सिर से अलग हो गया, जबकि सिर मां के गर्भ में ही फंसा रह गया.

घटना कलवारी थाना क्षेत्र के मुरादपुर गांव की है. यहां रहने वाले नीरज कुमार की 27 वर्षीय पत्नी प्रेमा देवी को 8 अप्रैल को प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी. परिजन आनन-फानन में उन्हें एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुदरहा ले जा रहे थे. रास्ते में ही बच्चे के पैर बाहर आने लगे, जिससे स्थिति नाजुक हो गई.

बस्ती के कुदरहा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से आई यह खबर सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि निर्दयी व्यवस्था की नंगी तस्वीर है। प्रसव के दौरान एक नवजात का सिर और धड़ अलग हो जाना—यह सुनने में जितना भयावह है, हकीकत उससे कहीं ज्यादा क्रूर है।
यह घटना किसी एक डॉक्टर या नर्स की भूल नहीं, बल्कि उस पूरे सिस्टम की विफलता है जो गरीब की जिंदगी को प्रयोग समझ बैठा है।क्या हुआ कुदरहा में?प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को अस्पताल में भर्ती किया गया। लेकिन इलाज के नाम पर जो हुआ, वह चिकित्सा नहीं—हत्यारी लापरवाही थी।नवजात का शरीर टुकड़ों में बंट गया और अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता ने इस त्रासदी को और भी भयावह बना दिया।
 जिम्मेदार कौन?ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और स्टाफ?अस्पताल प्रबंधन?या वह प्रशासन जो हर बार जांच के नाम पर पर्दा डाल देता है?सच यह है कि यह सिस्टम की सामूहिक हत्या है।
 राजनीतिक संज्ञान या औपचारिकता?उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर जांच की बात कही गई है, लेकिन बस्ती की जनता पूछ रही है—क्या यह भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा?
 बस्ती की जनता का गुस्सा:“क्या गरीब का बच्चा इंसान नहीं?”“सरकारी अस्पताल इलाज का केंद्र है या मौत का अड्डा?”ये सवाल अब सड़कों पर हैं, और जवाब सत्ता को देना ही होगा। अब निर्णायक कार्रवाई जरूरी:दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो
अस्पताल को तुरंत सील कर स्वतंत्र जांच हो,पूरे बस्ती जिले के स्वास्थ्य तंत्र का ऑडिटपीड़ित परिवार को न्याय—सिर्फ मुआवजा नहीं

कुदरहा, बस्ती की यह घटना चेतावनी है—अगर अब भी व्यवस्था नहीं जागी, तो हर प्रसव कक्ष एक संभावित श्मशान बन जाएगा।

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