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रविवार, 12 अप्रैल 2026

“बस्ती पूर्ति विभाग में ‘नवीन-प्रवीण गठजोड़’ का साम्राज्य? 18 वर्षों से जमे बाबू पर गंभीर आरोप”

 


“बस्ती पूर्ति विभाग में ‘नवीन-प्रवीण गठजोड़’ का साम्राज्य? 18 वर्षों से जमे बाबू पर गंभीर आरोप”


बस्ती।हरिओम, संवाददाता 
जिला पूर्ति कार्यालय में तैनात एक बाबू की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि पूर्व मंत्री की कथित अनुकम्पा से नियुक्त हुए नवीन चौधरी पिछले लगभग 18 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं और पूरे विभाग में उनका एकछत्र प्रभाव बना हुआ है। विभागीय सूत्रों और स्थानीय कोटेदारों के बीच चर्चा है कि कार्यालय में बिना उनकी मर्जी के कोई काम संभव नहीं होता।
“कार्यालय में बाबू, बाहर ‘प्राइवेट सरकार’!”बताया जा रहा है कि नवीन चौधरी के साथ मिलकर एक कथित प्राइवेट मुंशी प्रवीण कुमार पूरे सिस्टम को संचालित करता है। आरोप है कि प्रवीण कुमार कोटेदारों और अन्य हितधारकों से अवैध वसूली करता है और यह पैसा उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने का काम करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि “कार्यालय के अंदर नवीन बाबू का दबदबा है, तो बाहर प्रवीण कुमार की ‘प्राइवेट सरकार’ चलती है।”
कोटेदारों से वसूली का आरोप कई कोटेदारों का आरोप है कि राशन वितरण, कोटा आवंटन, निरीक्षण और नवीनीकरण जैसे कार्यों में उनसे जबरन पैसे वसूले जाते हैं। यदि कोई विरोध करता है, तो उसके खिलाफ जांच या कार्रवाई का डर दिखाया जाता है।
हर DSO ‘बेबस’ क्यों?
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि विभाग में आने वाले हर जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) कथित रूप से इस तंत्र के सामने बेबस नजर आते हैं। सूत्रों के अनुसार, “कई अधिकारी आए और गए, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी रही।”
सरकारी योजनाओं पर असर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं—जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), गरीबों को सस्ती दर पर राशन—इन आरोपों की वजह से प्रभावित हो रही हैं। आरोप है कि भ्रष्टाचार के चलते जरूरतमंदों तक सही लाभ नहीं पहुंच पा रहा।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। इतने लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारी और उसके कथित नेटवर्क पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।जांच की मांग तेज,स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक विभाग नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।

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