सनातन परिवार संस्था की कमजोरी और संस्कार विहीनता: युवाओं व किशोरों में यौन हिंसा का बढ़ता खतरा
राजेंद्र नाथ तिवारी, मुख्य सम्पादक 14अप्रेल 26,smy1.56
एक सभ्यता का संकट #भारतीय सनातन संस्कृति में परिवार को समाज का मूल आधार माना गया है। मनुस्मृति में कहा गया है, "पिता, माता, भाई-बहन और गुरु—ये परिवार के स्तंभ हैं जो व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पथ पर चलने की प्रेरणा देते हैं।" किंतु आधुनिक युग में शहरीकरण, पश्चिमी प्रभाव और आर्थिक दबावों ने इस पवित्र संस्था को कमजोर कर दिया है। परिणाम स्वरूप, युवाओं और किशोरों में संस्कारों की कमी ने यौन हिंसा को प्रोत्साहित किया है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध 16% बढ़े हैं, जिनमें 40% से अधिक मामले किशोरों द्वारा ही किए गए हैं। यह लेख सनातन परिवार की कमजोरियों का विश्लेषण करेगा और संस्कार पुनर्स्थापना के माध्यम से समाधान सुझाएगा। सनातन दर्शन में यौन ऊर्जा को 'काम' के रूप में संयमित किया जाता है। गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, "इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनोऽनुविधीयते।" अर्थात् इन्द्रियों को नियंत्रित न करने से पतन होता है। लेकिन आज के परिवार संस्कार-विहीन हो चुके हैं, जहां पिता कार्यालयों में लीन हैं, माताएं नौकरी में व्यस्त, और बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर खोए हैं। यह विघटन यौन हिंसा का जनक बन रहा है।
सनातन परिवार व्यवस्था: आदर्श बनाम वास्तविकता#सनातन परंपरा में परिवार संयुक्त था—दादा-दादी, चाचा-ताऊ, भाई-बहन एक छत के नीचे। यह व्यवस्था संस्कारों का माध्यम थी। उपनिषदों से लेकर रामायण तक, परिवार में गुरु-शिष्य परंपरा घर में ही जीवंत थी। लड़कों को ब्रह्मचर्य का पालन सिखाया जाता था, जबकि लड़कियों को सतीत्व की रक्षा। विवाह पूर्व संयम अनिवार्य था, क्योंकि "कामं क्रोधं लोभं मदं मोहं च" को जीतना ही पुरुषार्थ था।किंतु औपनिवेशिक काल से यह टूटा। ब्रिटिश शिक्षा ने पाश्चात्य व्यक्तिवाद थोपा, जिसने संयुक्त परिवार को परमाणु परिवार में बदल दिया। स्वतंत्र भारत में आर्थिक उदारीकरण ने इसे और गहरा दिया। आज 70% शहरी परिवार एकल हैं (जनगणना 2021), जहां माता-पिता 12-12 घंटे काम करते हैं। NCRB डेटा बताता है कि यौन हिंसा के 60% मामले शहरी क्षेत्रों से हैं। लखनऊ जैसे शहरों में, जहां तेजी से शहरीकरण हो रहा है, किशोरों में पोर्नोग्राफी की लत 50% से अधिक है (NFHS-5 सर्वे)।परिवार की कमजोरी का प्रमुख लक्षण है 'संस्कार विहीनता'। पुराणों में वर्णित गुण-परिचय संस्कार—जैसे नामकरण, विद्याारंभ, उपनयन—भुला दिए गए हैं। बच्चे अब स्कूलों में पढ़ते हैं, लेकिन घर में कोई धार्मिक चर्चा नहीं। पिता का स्थान 'रिमोट कंट्रोल' ले चुका है, माता का 'किचन' से 'ऑफिस'। इस रिक्तता में यौन विकृति पनपती है।
पिता की अनुपस्थिति और पुरुषत्व का ह्रास#सनातन में पिता 'गुरु' हैं, जो पुत्र को संयम सिखाते हैं। महाभारत में अर्जुन को पितृ-द्रोह का फल मिला। आज पिता घर से बाहर हैं। सर्वे (यूनिसेफ़ 2023) दिखाते हैं कि 65% भारतीय किशोर पिता से भावनात्मक जुड़ाव की कमी महसूस करते हैं। यह पुरुषत्व को कमजोर करता है। पोर्नोग्राफी युवाओं को हिंसक यौनता दिखाती है—'डॉमिनेशन' का मॉडल। परिणाम: निर्भया कांड जैसे अपराधों में अपराधी किशोर थे, जिनके परिवार टूटे थे।लखनऊ में हाल के मामलों में, कई किशोर बलात्कारियों के पिता मजदूर या व्यापारी थे, जो घर पर समय नहीं देते। संस्कारों की कमी से 'औजस संयम' भूल गए, जो आयुर्वेद में 'ओजस्' का स्रोत है।
माता की भूमिका में परिवर्तन और स्त्री शिक्षा का विपरीत प्रभाव#सनातन में माता 'लक्ष्मी स्वरूपा' हैं, जो संतान को सात्विक भोजन और कथाओं से संस्कारित करती हैं। रामचरितमानस में कौशल्या का राम को संस्कार देना इसका उदाहरण। लेकिन नारी सशक्तिकरण के नाम पर माताएं घर छोड़ रही हैं। NFHS-5 के अनुसार, 40% शहरी महिलाएं पूर्णकालिक नौकरी करती हैं। बच्चे आया या मोबाइल पर निर्भर।यह किशोरों में 'ओडिपस कॉम्प्लेक्स' जैसी विकृति पैदा करता है। लड़कियां बिना मातृ-संस्कार के 'फेमिनिनिटी' को गलत समझती हैं, जबकि लड़के हिंसा को 'मर्दानगी' मानते हैं। दिल्ली के 2024 के स्कूल कांडों में 30% आरोपी ऐसे थे जिनकी माताएं अनुपस्थित थीं।
संयुक्त से एकल परिवार: भावनात्मक शून्यता#संयुक्त परिवार में दादा-दादी कथाएं सुनाते—रावण की कामुकता का पतन। आज दादाजी 'ओल्ड एज होम' में हैं। असर 2024 रिपोर्ट बताती है कि 55% किशोरों को घर में कोई नैतिक चर्चा नहीं होती। इंटरनेट पोर्न 90% युवाओं तक पहुंचा है (इमाई सर्वे), जो हिंसक कंटेंट दिखाता है। परिवार की कमजोरी इसे रोक नहीं पाती।किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव होते हैं। सनातन में 'ब्रह्मचर्य व्रत' इसका समाधान था। अब 'हुक-अप कल्चर' प्रचलित। उनेस्को की 2023 रिपोर्ट में भारत के 25% किशोरों ने 'कंसेंट न समझने' को स्वीकार किया। डिजिटल युग का आघात: संस्कारों पर प्रहार#स्मार्टफोन परिवार का नया सदस्य। 10 वर्ष के बच्चे पोर्न देखते हैं। सनातन में 'इन्द्रिय निग्रह' सिखाया जाता था, लेकिन अब 'फ्रीडम' के नाम पर अनियंत्रित। एनसीआरबी 2024: साइबर पोर्न से प्रेरित 20% यौन अपराध। लखनऊ पुलिस ने 50+ मामलों में मोबाइल से लिंक पाया।आंकड़ों से प्रमाण: संकट की गहराई#NCRB 2024: POCSO मामलों में 1,50,000+ केस, 35% आरोपी 18 वर्ष से कम।NFHS-5: उत्तर प्रदेश में 28% किशोर पोर्न एक्सपोजर मानते हैं।WHO 2023: भारत में किशोरों में यौन हिंसा का जोखिम 15% ऊंचा, पारिवारिक बंधन कमजोर होने से।ये आंकड़े सनातन परिवार की विफलता चीख-चीखकर बता रहे हैं।
समाधान: सनातन संस्कारों की पुनर्स्थापना#सनातन हमें समाधान दे चुका है। परिवार को पुनर्जीवित करना होगा। पितृ-प्रधान संस्कार पुनरावलोकन,पिता को 'फैमिली हेड' बनाएं। साप्ताहिक 'पितृ-सभा' रखें, जहां रामायण-महाभारत की चर्चा हो। ब्रह्मचर्य शिक्षा अनिवार्य। आयुर्वेदिक 'ओजस रक्षा' योग सिखाएं।मातृ-संस्कृति का पुनरुत्थानमाताओं को पार्ट-टाइम जॉब्स प्रोत्साहित करें। 'मातृ-मंडल' बनाएं, जहां कथाएं सुनाई जाएं। सनातन में 'स्त्री शिक्षा' गृहिणी बनने पर जोर—न कि 'कॉर्पोरेट स्लेव'।संयुक्त परिवार की वापसीसरकार संयुक्त परिवारों को टैक्स छूट दे। 'गृह-गुरुकुल' मॉडल अपनाएं, जहां दादा-दादी संस्कार दें।डिजिटल नियंत्रण और कानूनी सख्तीपोर्न ब्लॉक करें। स्कूलों में 'संस्कार पाठ' जोड़ें। POCSO को सनातन दृष्टि से मजबूत करें—अपराधी को 'प्रायश्चित' भी सिखाएं।राष्ट्रवादी संगठन जैसे RSS परिवार प्रबोधन शिविर चला रहे हैं। इन्हें विस्तार दें। योगी आदित्यनाथ जैसे नेता उत्तर प्रदेश में 'बेटी बचाओ' से आगे 'परिवार संस्कार' अभियान चलाएं।
सनातन की विजय#सनातन परिवार कमजोर हुआ तो समाज हिंसक बनेगा। लेकिन यह अटल है—जैसे गंगा सूखी नदी को पुनर्जीवित करती है। युवा पीढ़ी को संस्कार दें, यौन हिंसा रुकेगा। राष्ट्रपिता कबीर ने कहा, "बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिल्या कोय। जो मन देखा आपना, मुझसे बुरा न कोय।" परिवार से शुरुआत करें, सनातन पुनरुत्थान होगा। भारत फिर विश्व गुरु बनेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें