बस्ती।
जिले की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच एक बार फिर निजी अस्पतालों की लापरवाही ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। बस्ती में संचालित ‘खुशी हॉस्पिटल’ में इलाज के नाम पर कथित लापरवाही का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। जहां मरीज को स्वस्थ करने का दावा किया जाता है, वहीं अब यह अस्पताल एक परिवार के लिए मातम का कारण बन गया।परिजनों का आरोप है कि मरीज को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था, लेकिन समय पर सही उपचार नहीं मिला। अस्पताल प्रशासन ने पहले तो इलाज का भरोसा दिया, लेकिन कुछ ही समय बाद मरीज की हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही व गलत उपचार के गंभीर आरोप लगाए गए।
बताया जा रहा है कि परिजनों ने कई बार डॉक्टर को बुलाने और बेहतर इलाज की गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल के स्टाफ ने कथित तौर पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया। जब तक मरीज को दूसरे अस्पताल ले जाने की बात हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि जिले में कई निजी अस्पताल बिना पर्याप्त संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के ही संचालित हो रहे हैं, जिससे आए दिन मरीजों की जान जोखिम में पड़ती है। ऐसे मामलों ने पहले भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि कई जगह बिना पर्याप्त डॉक्टर या स्टाफ के अस्पताल चलने की शिकायतें सामने आती रही ह
प्रशासन पर भी उठे सवाल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसे अस्पतालों को लाइसेंस कैसे मिल जाता है और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कहां है? अगर समय रहते निरीक्षण और सख्त कार्रवाई होती, तो शायद एक परिवार की दुनिया उजड़ने से बच सकती थी।मांग उठी – हो उच्चस्तरीय जांच-परिजनों और स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो यह लापरवाही आगे और जिंदगियां निगल सकती है।सवाल अभी भी बाकी हैं:क्या अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर और संसाधन मौजूद थे?क्या इलाज में लापरवाही हुई?और सबसे बड़ा सवाल – क्या स्वास्थ्य विभाग इस मौत की जिम्मेदारी तय करेगा?फिलहाल यह घटना बस्ती की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
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