डीएसओ के पत्र की सच्चाई, जिला प्रशासन पर खडे सवाल? रसोई गैस की किल्ल्त, उपभोक्ता परेशान
बस्ती।
जनपद बस्ती में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर उत्पन्न संकट अब सीधे जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) बस्ती के कार्यालय से जारी पत्र ने इस पूरे मामले को नई दिशा दे दी है और प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
9 मार्च 2026 को जारी पत्र में जिला पूर्ति अधिकारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि जनपद में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रही है। पत्र के अनुसार जनपद में कुल 40 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिनमें 11 इंडियन ऑयल, 10 बीपीसीएल तथा 19 एचपीसीएल की एजेंसियां शामिल हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीएसी/लॉक की सीमा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक किए जाने के कारण गैस सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने अब इस सीमा को 50 प्रतिशत तक करने का अनुरोध किया है, जिससे आपूर्ति सामान्य हो सके।
इधर जनपद में गैस की कमी के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि कई जगहों पर गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। प्रशासनिक उदासीनता के कारण ही आज हजारों उपभोक्ता रसोई गैस के लिए भटकने को मजबूर हैं।
बस्ती।
जनपद बस्ती में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर उत्पन्न संकट अब सीधे जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) बस्ती के कार्यालय से जारी पत्र ने इस पूरे मामले को नई दिशा दे दी है और प्रशासनिक व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
9 मार्च 2026 को जारी पत्र में जिला पूर्ति अधिकारी ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया है कि जनपद में गैस सिलेंडरों की आपूर्ति अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रही है। पत्र के अनुसार जनपद में कुल 40 गैस एजेंसियां संचालित हैं, जिनमें 11 इंडियन ऑयल, 10 बीपीसीएल तथा 19 एचपीसीएल की एजेंसियां शामिल हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीएसी/लॉक की सीमा 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक किए जाने के कारण गैस सिलेंडरों की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने अब इस सीमा को 50 प्रतिशत तक करने का अनुरोध किया है, जिससे आपूर्ति सामान्य हो सके।
इधर जनपद में गैस की कमी के कारण उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर लोग सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जबकि कई जगहों पर गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाता तो यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। प्रशासनिक उदासीनता के कारण ही आज हजारों उपभोक्ता रसोई गैस के लिए भटकने को मजबूर हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब जिला प्रशासन स्वयं गैस आपूर्ति में बाधा की बात स्वीकार कर रहा है, तो आखिर इस संकट के लिए जिम्मेदार कौन है? क्या प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए गैस कंपनियों पर दोष मढ़ रहा है?
जनपद में बढ़ते जनाक्रोश के बीच यह मुद्दा अब प्रशासन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर बहस का विषय बनता जा रहा है।
— विशेष संवाददाता

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