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सोमवार, 26 जनवरी 2026

यूजीसी कानून के विरोध में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने दिया इस्तीफा

 यूजीसी कानून और शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई के विरोध में ब्राह्मण सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया!



मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ। उत्तर प्रदेश से ब्यूरोक्रेसी में एक सिटी मजिस्ट्रेट ने यूजीसी और शंकराचार्य जी के अपमान से नाराज़ होकर इस्तीफ़ा देकर सन्नाटे में झन्नाता पैदा कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों से आहत होकर अलंकार अग्निहोत्री सिटी मजिस्ट्रेट बरेली ने इस्तीफा दे दिया है। कानपुर के मूल निवासी अलंकार अग्निहोत्री 2016 बैच के पीसीएस अफसर हैं।उनके अनुसार वह शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई घटना से आहत हैं। साथ ही उन्होंने यूजीसी के नए कानून पर विरोध जताया। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोमवार को सोशल मीडिया पर सामने आई है, जिसमें वह पोस्टर लेकर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पोस्टर में लिखा है कि हैशटैग यूजीसी रोल बैक, काला कानून वापस लो। "शंकराचार्य और संतों को यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान"। वह उन्नाव, बलरामपुर, एटा, लखनऊ में बतौर डिप्टी कलेक्टर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।उन्होंने बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर अपनी तैनाती के बाद सोशल मीडिया पर पुनरुत्थान बरेली परिवार नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था। जिसमें उनके 529 फॉलोअर हैं। सोमवार को उनके (अलंकार अग्निहोत्री) इस्तीफा देने की खबरें भी सबसे पहले इसी ग्रुप पर वायरल हुईं और ग्रुप पर जुड़े तमाम सदस्य अलंकार अग्निहोत्री से पद से इस्तीफा न देने की भी बातों का उल्लेख किया है। कुछ लोगों ने हिंदुत्व को धार देते हुए पद से इस्तीफा देना उचित भी बताया है और कुछ ने संवैधानिक पद पर बने रहना भी जरूरी बताया है।



यूजीसी कानून पर अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। नए नियम छात्रों के करियर और व्यक्तिगत जीवन को जोखिम में डाल सकते हैं। इस कानून से सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को शोषण होगा। इससे विषमता पैदा होगी। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज के सांसद और विधायकों द्वारा विरोध दर्ज नहीं किया जा रहा है। ये एक कॉपरेट कंपनी के कर्मचारी के रूप में काम कर रहे हैं। जब कंपनी के सीईओ नहीं बोलेंगे तब तक उनके हाथ नहीं हिलेंगे। अलंकार ने ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से इस्तीफा देक समाज के साथ खड़े होने की अपील की है।


अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में लिखा है कि प्रयागराज में माघ मेले में मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानन्द एवं उनके शिष्य, बटुक, ब्राह्मणों से स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मारपीट की। वृद्ध आचार्यों को मारते हुए बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर एवं उसकी शिखा को पकड़कर घसीटकर पीटा गया और उसकी मर्यादा का हनन किया गया, चूंकि चोटी/शिखा ब्राह्मण, साधु संतों का धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रतीक है और मैं (अलंकार अग्निहोत्री) स्वयं ब्राह्मण वर्ण से हूं। पत्र में आगे लिखा है कि घटना से यह स्पष्ट है कि स्थानीय प्रशासन द्वारा ब्राह्माणों का अपमान किया गया है। अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी कहा है कि प्रयागराज में हुई घटना एक चिंतनीय एवं गंभीर विषय है और ऐसे प्रकरण इस सरकार में होना एक साधारण ब्राह्मण की आत्मा को कंपा देता है। इस प्रकरण से यह प्रतीत होता है कि स्थानीय प्रशासन एवं वर्तमान की राज्य सरकार एक ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के साथ काम कर रही है एवं साधु संतों की अस्मिता के साथ खिलवाड़ कर रही है। बता दें कि यूजीसी के मुद्दे पर झांसी के वरिष्ठ भाजपा नेता पूर्व मंत्री रविन्द्र शुक्ला ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपसे ऐसी अपेक्षा नहीं थी।इसी मुद्दे पर पार्टी से असंतुष्ट होकर भाजपा के एक बूथ अध्यक्ष ने भी भाजपा से त्यागपत्र दे दिया है।

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