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मंगलवार, 30 दिसंबर 2025

कंटेंट क्रिएटर नहीं, कंटेंट रिफार्मर बनें : प्रो. संजय द्विवेदी

 

कंटेंट क्रिएटर नहीं, कंटेंट रिफार्मर बनें : प्रो. संजय द्विवेदी

वायरल नहीं, मूल्यवान हो डिजिटल सामग्री

‘वेब मीडिया समागम–2025’ में देशभर से जुटे डिजिटल मीडिया दिग्गज


भागलपुर (बिहार)।

भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि डिजिटल मीडिया के व्यापक प्रभाव के साथ उसकी सामाजिक जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ गई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम केवल कंटेंट क्रिएटर बनकर न रह जाएँ, बल्कि कंटेंट लीडर और कंटेंट रिफार्मर की भूमिका निभाएँ। करोड़ों लोगों तक पहुँचने वाला हर शब्द, हर दृश्य और हर विचार अपने आप में एक सामाजिक संदेश होता है—इसलिए कंटेंट केवल वायरल नहीं, बल्कि मूल्यवान भी होना चाहिए।

प्रो. द्विवेदी वेब जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा भागलपुर में आयोजित ‘वेब मीडिया समागम–2025’ को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी कुमार चौबे, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. बृजेश कुमार सिंह, संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आनंद कौशल तथा राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अमित रंजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। समागम में देशभर से आए डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों में विमर्श किया और संगठनात्मक विस्तार पर भी चर्चा हुई।

प्रो. द्विवेदी ने कहा कि लोकप्रियता से अधिक आवश्यक है कि डिजिटल सामग्री समाज को बेहतर बनाए, नागरिक विवेक को विकसित करे और संवाद की स्वस्थ संस्कृति को मजबूत करे। फेक न्यूज़, तथ्यहीन दावे और सनसनीखेज प्रस्तुति आज मीडिया की विश्वसनीयता के लिए गंभीर संकट बन चुकी है। एल्गोरिद्म की मजबूरियाँ क्रिएटर्स को रचनात्मकता से दूर कर केवल ट्रेंड के पीछे दौड़ने के लिए विवश कर रही हैं।

उन्होंने चेताया कि लाइक्स, फॉलोअर्स और व्यूज़ की अंधी दौड़ मानसिक तनाव, आत्मसम्मान के संकट और सामाजिक ध्रुवीकरण को जन्म दे रही है। ट्रोल संस्कृति समाज के ताने-बाने को कमजोर कर रही है। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जिम्मेदार डिजिटल क्रिएटर की पहचान सत्यनिष्ठा, संवेदना और सामाजिक हित से होती है। विश्वसनीय सूचना देना, सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देना, आंचलिक भाषाओं व स्थानीय मुद्दों को मंच देना, जनसमस्याओं को स्वर देना तथा स्वस्थ हास्य और मानवीय मूल्यों को बनाए रखना आज की डिजिटल नैतिकता के प्रमुख आधार हैं।

उन्होंने वेब पत्रकारों से आह्वान करते हुए कहा,“आपके पास केवल कैमरा या रिंग लाइट नहीं है, आपके पास समाज को रोशन करने की रोशनी है। आप वह पीढ़ी हैं जो बिना न्यूज़रूम के पत्रकार, बिना स्टूडियो के कलाकार और बिना मंच के विचारक हैं। तोड़ने वाले बहुत हैं, अब ऐसे लोगों की ज़रूरत है जो देश और दिलों को जोड़ने का काम करें।”

जड़ों से जुड़ी रहे पत्रकारिता : अश्विनी चौबे पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि हर युग में पत्रकारों ने अपनी लेखनी से परिवर्तन और क्रांति लाई है। आज तकनीक-प्रेरित मीडिया का युग है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों से जुड़े रहकर ही श्रेष्ठ पत्रकारिता संभव है। भाजपा नेता प्रीति शेखर ने कहा कि संचार क्रांति ने युवाओं के लिए नए अवसर खोले हैं और स्थानीय भाषाओं में सामग्री पहुँचाने के नए द्वार खुले हैं।

सूचनाओं को दबाना अब असंभव : डॉ. बृजेश कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने कहा कि बीते 15 वर्षों में मीडिया परिदृश्य में ऐतिहासिक बदलाव आया है। सस्ते इंटरनेट डाटा और व्यापक पहुँच ने सूचना का लोकतंत्रीकरण कर दिया है। अब सूचनाओं को दबाना संभव नहीं रहा। उन्होंने कहा कि वेब पत्रकारों के पास अक्सर बड़ी टीमें नहीं होतीं, इसलिए सत्यापन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। समाज का भरोसा अर्जित करना आज वेब पत्रकारिता की सबसे बड़ी चुनौती और ताकत दोनों है।


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