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सोमवार, 1 दिसंबर 2025

गीता में समष्टि और व्यष्टि का पूरा सार

 राजेंद्र नाथ तिवारी





गीता जयंती पर भगवद्गीता की प्रासंगिकतागीता जयंती मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जो 1 दिसंबर 2025 अर्थात आज  है, और इस वर्ष यह मोक्षदा एकादशी के साथ संयोग बना रही है। इस पावन दिवस पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कुरुक्षेत्र के रणक्षेत्र में अर्जुन को दिए गए भगवद्गीता के उपदेश की स्मृति होती है, जो न केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करता है बल्कि आधुनिक जीवन की चुनौतियों का समाधान भी।
आधुनिक संदर्भ में गीता का महत्वआज के युग में भगवद्गीता निष्काम कर्मयोग, धैर्य और स्थितप्रज्ञ की अवस्था सिखाती है, जो तनावपूर्ण जीवन, निर्णय लेने और नेतृत्व में सहायक सिद्ध हो रही है। हार्वर्ड, आईआईएम और भारतीय सेना जैसे संस्थान गीता के सिद्धांतों को निर्णय-निर्माण, तनाव प्रबंधन और नेतृत्व प्रशिक्षण में शामिल कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में वैश्विक स्तर पर गीता महोत्सव में भागीदारी का उल्लेख कर इसके सार्वभौमिक आकर्षण पर बल दिया।
जीवन के व्यावहारिक उपदेश कर्मयोग: फल की चिंता किए बिना कर्तव्य पालन करें, जो आधुनिक कार्यस्थलों में उत्पादकता बढ़ाता है।समभाव: सुख-दुख, लाभ-हानि में समान रहें, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।स्वधर्म: अपनी भूमिका निभाएं, जो व्यक्तिगत और सामाजिक स्थिरता सुनिश्चित करता है।
धर्म स्थापना: अधर्म के समय सत्य की रक्षा, जो समकालीन सामाजिक मुद्दों पर प्रासंगिक है।समापन संदेशगीता जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मजागरण का अवसर है, जहां गीता का ज्ञान अपनाकर व्यक्ति शांति के साथ गतिशील जीवन जी सकता है। इस ग्रंथ के सिद्धांत आज भी मानव कल्याण और विश्व शांति के लिए प्रासंगिक बने हुए है.

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