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शनिवार, 27 सितंबर 2025

मुक़बधिरों को समाज की मुख्यधारा मे लाना सबसे पुनीत कार्य

   मूक-बधिरता के प्रारंभिक लक्षणों की दी जानकारी

जौनपुर।उत्तरप्रदेश
 विश्व मूक बधिर दिवस के उपलक्ष्य में उमानाथ सिंह सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, एवं रोटरी क्लब   के संयुक्त तत्वावधान में  शिविर और जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन पी.एम. श्री कम्पोजिट विद्यालय, इब्राहिमाबाद में संपन्न हुआ, जिसमें मूक-बधिर बच्चों की पहचान, देखभाल एवं पुनर्वास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ साझा की गईं।बधिर व्यक्तियों के अंतर्राष्ट्रीय सप्ताह के तहत शिविर का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. आर.बी. कमल और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ए.ए. जाफरी के निर्देशन में किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों की टीम ने बच्चों की जांच की और अभिभावकों को व्यक्तिगत परामर्श प्रदान किया।मेडिकल कॉलेजके डॉ. राजश्री यादव ने   कहा 




, समय पर की गई पहचान न केवल बच्चों को सामान्य जीवन जीने का अवसर देती है, बल्कि समाज को भी समावेशिता की ओर अग्रसर करती है। उन्होंने मूक-बधिरता के प्रारंभिक लक्षणों और कारणों पर भी विस्तृत जानकारी दी और बताया कि यदि जन्म के शुरुआती महीनों में ही लक्षणों की पहचान कर ली जाए तो आधुनिक चिकित्सा पद्धतियाँ बच्चों के भविष्य को बदल सकती हैं।प्रोफेसर डॉ. बृजेश कनौजिया  ने ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के शिविरों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि, विश्व भर में 466 मिलियन से अधिक लोग गंभीर श्रवण हानि से ग्रसित हैं। जागरूकता की कमी के चलते उन्हें सामाजिक कलंक, अलगाव और अवसरों की कमी का सामना करना पड़ता है। शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप जीवन को बदल सकता है। डॉ नीरज,   राजू मजूमदार, सीए सुजीत अग्रहरी, संजय जायसवाल, दीपमाला जायसवाल, अनुराधा शर्मा, माधुरी जायसवाल, आरती यादव, विजय कला, फौजदार, एवं कई बच्चों के अभिभावक उपस्थित रहे।

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