होनहार बिरवान के होत चिकने पात: डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी ने रचा मेधा, परिश्रम और संस्कार का स्वर्णिम इतिहास
बस्ती , वशिष्ठ नगर, संवाददाता।
“होनहार बिरवान के होत चिकने पात” भारतीय लोकजीवन की यह कालजयी कहावत आज आदर्श डॉ कांचन माला त्रिपाठी एवं उनके पति श्री अनिल कुमार त्रिपाठी की प्रतिभाशाली संतति डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी पर अक्षरशः चरितार्थ होती दिखाई देती है।
मध्यमवर्गीय परिवार की सादगीपूर्ण पृष्ठभूमि से निकलकर कठोर परिश्रम, अनुशासन और अदम्य संकल्प के बल पर डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में वह उपलब्धि अर्जित की है, जो हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का दीपस्तंभ बन चुकी है।
नीट जैसी कठिन और बहुस्तरीय प्रतियोगी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर उन्होंने मोतीलाल नेहरू गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, प्रयागराज से सम्मानपूर्वक एमबीबीएस की उपाधि प्राप्त की। यह उपलब्धि स्वयं में ही किसी साधना से कम नहीं थी, किंतु प्रतिभा का वास्तविक मूल्य तब सिद्ध होता है जब सफलता निरंतरता का रूप धारण कर ले।
इसी क्रम में डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी ने पुनः अपनी विलक्षण मेधा का परिचय देते हुए ऑल इंडिया इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज के तत्वावधान में आयोजित देश की अत्यंत प्रतिष्ठित एवं चुनौतीपूर्ण पीजी प्रवेश परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता अर्जित कर एक नया इतिहास रच दिया है।अब उन्हें देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों , एम्स दिल्ली, एम्स ऋषिकेश तथा एम्स पटना में उच्च प्रशिक्षण एवं चिकित्सकीय अध्ययन का गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त होगा। यह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि उस भारतीय मध्यमवर्गीय संघर्षशील समाज की विजय है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को संस्कार, शिक्षा और श्रम का सर्वोच्च मूल्य सिखाता है।
इस गौरवशाली उपलब्धि के पश्चात परिवार ने अपनी भारतीय सांस्कृतिक चेतना और आस्था का परिचय देते हुए बुद्धिमानों में श्रेष्ठ, संकटमोचन भगवान हनुमान जी के श्रीचरणों में कृतज्ञता अर्पित की। डॉ॰ कांचन माला त्रिपाठी, अनिल त्रिपाठी त्रिपाठी एवं अशोक कुमार पाण्डेय ने आज प्रातःकाल श्री हनुमान गढ़ी मन्दिर, अयोध्या पहुँचकर प्रभु के समक्ष शीश नवाया और परिवार की इस उपलब्धि हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर उनके शुभचिंतकों में प्रमुख राजेन्द्र नाथ तिवारी ने कहा कि आज के समय में बिना किसी विशेष सुविधा, प्रभाव अथवा आरक्षण के केवल प्रतिभा और कठोर परिश्रम के आधार पर एमबीबीएस एवं पीजी जैसी कठिन परीक्षाओं में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करना केवल भाग्य नहीं, बल्कि यह सौभाग्य, तपस्या और पारिवारिक संस्कारों की विजय है। उन्होंने कहा कि ऐसे मेधावी युवाओं के कारण ही भारत की बौद्धिक परंपरा और चिकित्सा क्षेत्र का भविष्य सुरक्षित एवं गौरवशाली दिखाई देता है।
कौटिल्य फाउंडेशन की ओर से उन्होंने यह भी घोषणा की कि शीघ्र ही डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी को उनकी अद्वितीय प्रतिभा, अनुकरणीय परिश्रम और राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियों के सम्मान में उनके आवास पर जाकर सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा।
इस अवसर पर सूर्य प्रकाश शुक्ला, उद्शकर शुक्ला, विश्वनाथ पांडे, मनोज ydav एवं सतीश तिवारी सहित अनेक गणमान्य शुभचिंतकों ने डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी के उज्ज्वल, यशस्वी और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण भविष्य की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।
डॉ॰ ऋतुराज त्रिपाठी की यह सफलता केवल एक विद्यार्थी की उपलब्धि नहीं, बल्कि उस भारतीय आत्मा का जीवंत उदाहरण है जो सीमित साधनों में भी असीम संभावनाओं का सृजन करना जानती है। यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, संस्कार मजबूत हों और परिश्रम निरंतर हो, तो सफलता स्वयं चलकर चरण स्पर्श करती है।


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