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बुधवार, 27 मई 2026

ब्रह्ममुहूर्त में थमा एक राष्ट्रनिष्ठ जीवन का अविराम प्रवाह

 श्रद्धांजलि : एक राष्ट्रनिष्ठ जीवन की अनंत यात्रा

बस्ती,  विशिष्ठ नगर सम्वाददाता 



पुरानी बस्ती के तिवारी टोला निवासी, श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के समर्पित सहयात्री, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दीर्घकालीन स्वयंसेवक तथा जनसंघ–भाजपा विचारधारा के प्रथम पंक्ति के कर्मयोगी राजेंद्र प्रसाद तिवारी आज ब्रह्ममुहूर्त में अपनी सांसारिक यात्रा पूर्ण कर अनंत चेतना में विलीन हो गए। उनके देहावसान का समाचार समूचे बस्ती जनपद के राष्ट्रवादी, सामाजिक एवं वैचारिक परिवेश के लिए अत्यंत मर्मांतक है। राजेंद्र प्रसाद तिवारी उन व्यक्तित्वों में थे जिन्होंने केवल विचार नहीं जिए, बल्कि राष्ट्रभावना को अपने आचरण, व्यवहार और जीवन-संघर्ष में उतारा। श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन के उग्र और संघर्षपूर्ण कालखंड में वे बस्ती जनपद की वैचारिक चेतना के प्रमुख स्तंभों में रहे। संगठन के प्रति निष्ठा, राष्ट्र के प्रति समर्पण और समाज के प्रति आत्मीयता उनके व्यक्तित्व की पहचान थी।वे उन दुर्लभ कार्यकर्ताओं में थे जिनकी वाणी में संयम, व्यवहार में सरलता और चिंतन में राष्ट्र सर्वोपरि रहता था। नगर के विभिन्न दायित्वों पर रहते हुए उन्होंने सदैव संगठनात्मक मर्यादा, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। उनका घर केवल एक परिवार का निवास नहीं, बल्कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े असंख्य कार्यकर्ताओं का आत्मीय केंद्र रहा।आज उनका पार्थिव शरीर पुण्यसलिला सरयू के पावन तट पर अग्निदेव को समर्पित होगा, किन्तु उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा-अग्नि बनकर सदैव प्रकाशित रहेगा।

वे स्मृतिशेष अवश्य हुए हैं, परंतु उनके संस्कार, उनकी आत्मीय मुस्कान, उनका सौम्य व्यक्तित्व और राष्ट्र के प्रति उनकी अडिग प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी।उनके सुपुत्र श्री  महेन्द्र  तिवारी  वर्तमान में बस्ती प्रेस क्लब के महामंत्री के रूप में सक्रिय सामाजिक दायित्व निभा रहे हैं। इस असह्य दुःख की घड़ी में समस्त शोकाकुल परिवार के प्रति हमारी गहन संवेदनाएँ हैं। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा परिवारजनों और शुभचिंतकों को यह वज्रपात सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

“राष्ट्रभाव से दीप्त जीवन कभी समाप्त नहीं होता, वह पीढ़ियों की चेतना में संस्कार बनकर जीवित रहता है।”उनके  श्री  चरणों  में  मेरा  अंतिम  प्रणाम, 

 

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