“मोमोज की चटनी में ज़हर जैसी हरकत?”
बस्ती में फैली सनसनी, प्रशासन कब तोड़ेगा चुप्पी?
बस्ती, हरिओम प्रकाश, संवाददाता,
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर प्रशासन और पुलिस की ओर से अब तक स्पष्ट स्थिति क्यों नहीं रखी गई?
जनता जानना चाहती है—क्या नमूने जांच के लिए भेजे गए?क्या कोई प्राथमिकी दर्ज हुई?
क्या वायरल तस्वीरें और दावे प्रमाणित हैं?या फिर यह किसी की सोची-समझी साजिश है?
आज सोशल मीडिया का दौर है। एक अपुष्ट वीडियो, एक फोटो और कुछ उत्तेजक शब्द पूरे शहर में आग की तरह फैल जाते हैं। ऐसे में पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि सत्य को शीघ्र सामने लाना भी है।अफवाहों पर कठोर रोक लगे
यदि कोई व्यक्ति बिना प्रमाण समाज में भय फैलाने का कार्य कर रहा है, तो उसके विरुद्ध आईटी एक्ट और दंडात्मक धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि झूठी अफवाहें कई बार दंगों और हिंसा की वजह बन जाती हैं।फास्ट फूड संस्कृति पर भी सवाल,?
यह घटना एक चेतावनी भी है कि लोग केवल स्वाद के पीछे भागते हुए स्वच्छता और गुणवत्ता को नजरअंदाज न करें। सड़क किनारे बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच होनी चाहिए। नगर प्रशासन और खाद्य विभाग को विशेष अभियान चलाना चाहिए ।जनता संयम रखे
जब तक प्रशासनिक पुष्टि न हो, तब तक किसी भी वायरल पोस्ट को अंतिम सत्य मानना खतरनाक है। समाज को उत्तेजना नहीं, सत्य और कानून के रास्ते पर चलना चाहिए।
अब समय है कि पुलिस खुले मंच से बयान दे—“सत्य क्या है?”क्योंकि मौन, अफवाहों को और ताकत देता है।
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