कटरा पानी टंकी पर अतिक्रमण का बारूद: प्रशासन खामोश, हादसे का इंतजार?
हरिओम प्रकाश, संवाददाता, 4अप्रेल 26,समय 3. 15
बस्ती शहर के कटरा पानी टंकी के सामने की स्थिति किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दे रही है, लेकिन प्रशासन मानो आंखें मूंदकर बैठा है। पानी टंकी के सामने मिठाई की दुकान, उसी दुकान के सामने मिठाई व्यापारी का वाहन खड़ा, बीच सड़क पर संत गाडगे की प्रतिमा, और उसके बाद बेहद पतला एकल मार्ग — यही है शहर के इस महत्वपूर्ण मार्ग की सच्चाई।हालात इतने बदतर हैं कि सड़क के दूसरी ओर अल्प आय वर्ग के लोगों की छोटी-छोटी दुकानें हैं, जिनके कारण आवागमन का रास्ता और भी संकरा हो गया है। एक तरफ अतिक्रमण, दूसरी तरफ वाहन खड़े, और बीच में गुजरने को मजबूर लोग — यह दृश्य रोजाना दुर्घटना के खतरे को जन्म दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नगर पालिका परिषद की भारी-भरकम टीम, आयुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान की मौजूदगी के बावजूद इस स्थिति पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन किसी अप्रत्याशित अनहोनी का इंतजार कर रहा है?कटरा पानी टंकी से दीवानी चौराहा तक का मार्ग पहले ही एकल रास्ता बन चुका है। ऐसे में जाम, अव्यवस्था और दुर्घटना का खतरा हर पल बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आज हालात ऐसे हैं कि सड़क पर खड़े वाहन, अवैध अतिक्रमण और अव्यवस्थित व्यवस्था ने पूरे मार्ग को जाम की गिरफ्त में डाल दिया है। लेकिन प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।
“मुँह की बात सुने हर कोई, मन की बात को जाने कौन,
आवाज़ों के बाज़ार में ख़ामोशी पहचाने कौन।”
बस्ती में प्रशासनिक व्यवस्था पर यही पंक्तियाँ सटीक बैठती हैं। सवाल यह है कि आखिर कब तक शहर के लोग इस अराजक व्यवस्था का बोझ ढोते रहेंगे? क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा, या फिर समय रहते इस अतिक्रमण और अव्यवस्था पर कार्रवाई होगी? अब नजरें प्रशासन पर हैं — कार्रवाई होगी या हादसे का इंतजार?भाजपा नेता रमेश चक्रवर्ती ने कहाँ है आखिर प्रशासनिक संवेदनाये कब नींद से उठेंगी.


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें