कप्तानगंज ब्लॉक में बेलगाम सचिव! पंचायत भवन सूने, कागज़ों में चल रही ड्यूटी — प्रशासन कब जागेगा?
बस्ती। वी के त्रिपाठी, संवाददाता, समय 9अप्रेल 26 2.45,
जिले के विकासखण्ड कप्तानगंज में ग्राम पंचायतों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि यहां तैनात कुछ ग्राम पंचायत सचिव अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह बेपरवाह हो गए हैं। स्थिति यह है कि जिन पंचायत भवनों को ग्रामीण प्रशासन का केंद्र माना जाता है, वे अक्सर सूने पड़े रहते हैं, जबकि सचिव या तो ब्लॉक मुख्यालय पर बैठकर समय गुजारते हैं या फिर घर बैठकर कागजों में ड्यूटी पूरी कर रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम पंचायतों में सचिवों की अनुपस्थिति का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों को प्रमाण पत्र, योजनाओं की जानकारी, पेंशन, आवास और अन्य पंचायत से जुड़े कार्यों के लिए कई-कई चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन पंचायत भवन में सचिवों के न मिलने से उन्हें निराश होकर लौटना पड़ता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ सचिव न तो नियमित रूप से पंचायत भवन में बैठते हैं और न ही ब्लॉक मुख्यालय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। कई मामलों में यह भी सामने आया है कि सचिव घर बैठे ही कागजी कार्रवाई पूरी कर देते हैं, जिससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।सूत्रों के अनुसार, यह स्थिति अचानक नहीं बनी है। लंबे समय से चल रही प्रशासनिक उदासीनता के कारण कुछ सचिवों के हौसले बुलंद हो गए हैं। ब्लॉक स्तर पर निगरानी की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उन पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि ब्लॉक स्तर पर कड़ाई से निगरानी की जाए तो सचिवों की मनमानी पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है।
कप्तानगंज विकासखंड में इस अव्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा उंगलियां ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) और सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) की कार्यशैली पर उठ रही हैं। आरोप है कि उनकी लापरवाही और ढीले रवैये के कारण ही कुछ सचिव बेखौफ होकर अपने कर्तव्यों की अनदेखी कर रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवनों को गांव के प्रशासनिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई थी ताकि लोगों को अपने ही गांव में सरकारी सेवाएं मिल सकें। लेकिन जब पंचायत सचिव ही वहां उपस्थित नहीं होंगे तो इन भवनों का उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। कई पंचायत भवनों में ताले लटकते रहते हैं और ग्रामीणों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी ब्लॉक मुख्यालय का रुख करना पड़ता है।
स्थिति यह है कि कुछ ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गति भी प्रभावित हो रही है। मनरेगा, शौचालय, प्रधानमंत्री आवास, सड़क और अन्य योजनाओं की प्रगति पर भी इसका असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिवों की अनियमितता के कारण योजनाओं की निगरानी सही तरीके से नहीं हो पा रही है।इस पूरे मामले ने जिले के प्रशासन के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। जिले के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सार्थक अग्रवाल अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर लगातार सक्रिय रहते हैं। ऐसे में कप्तानगंज ब्लॉक में सचिवों की मनमानी और कथित भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करना उनके लिए भी एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। साथ ही दोषी पाए जाने वाले सचिवों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की भी मांग उठ रही है ताकि पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही तय हो सके।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास और पारदर्शी प्रशासन के लिए लगातार योजनाएं चला रही है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी ही अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लें तो इन योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाता।
अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब कप्तानगंज ब्लॉक में फैली इस अव्यवस्था पर अंकुश लगाया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।ग्रामीणों का साफ कहना है कि पंचायतों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और सख्त अनुशासन ही एकमात्र रास्ता है, अन्यथा गांवों के विकास की रफ्तार इसी तरह प्रभावित होती रहेगी।

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