बस्ती
कुछ दुःख ऐसे होते हैं जिनके सामने शब्द भी मौन हो जाते हैं।
यह वही क्षण है—जब मन भारी है, हृदय व्यथित है और आत्मा शोक से भर उठी है।
अपने पूज्य दादाजी के अंतिम दर्शन हेतु दिल्ली से पैतृक गांव की ओर निकले,देवेश सिंह गौतम (आयु 29 वर्ष) को क्या पता था कि यह यात्रा दर्शन की नहीं,बल्कि स्वयं की अंतिम यात्रा बन जाएगी।आगरा एक्सप्रेस-वे पर हुई भीषण मार्ग दुर्घटना,ने एक ही पल में सात परिवारों की खुशियों को छीन लिया।
उसी हृदयविदारक हादसे में,भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री अजय सिंह गौतम के भतीजे,देवेश का असमय निधन हो गया।यह समाचार केवल एक परिवार की नहीं,बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है।
कल जिस घर में दादा की चिता जली,आज उसी घर में नाती देवेश को अग्नि समर्पित किया जाएगा।
एक साथ दो पीढ़ियों का विदा होना—यह नियति का ऐसा क्रूर प्रहार है,जिसे स्वीकार करना किसी भी मनुष्य के लिए असहनीय है।देवेश केवल एक पुत्र या भतीजा नहीं थे,वे परिवार की आशा, स्नेह और भविष्य की कड़ी थे।उनका यूँ अचानक चले जाना.असंख्य सपनों का अधूरा रह जाना है,
और अपनों के हृदय में जीवनभर का रिक्त स्थान छोड़ जाना है।
मैं, राजेंद्र नाथ तिवारी,इस अत्यंत दुःखद और मर्मांतक घड़ी मेंशोकाकुल परिवार के साथ
पूरी संवेदना और आत्मीय सहभागिता प्रकट करता हूँ।
ईश्वर से प्रार्थना है किदिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें,और परिवार को इस असह्य वज्रपात को सहने कीअसीम शक्ति, धैर्य और संबल प्रदान करें।ईश्वर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न होने दें—
यही एकमात्र प्रार्थना शेष रह जाती है।
🙏 ॐ शांति।

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