बजट 2026: विकास की नींव मजबूत, कौटिल्य नीति का आधुनिक स्वरूप
कौटिल्य संपादकीय
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश केंद्रीय बजट 2026-27 ने आत्मनिर्भर भारत की दृढ़ संकल्पना को साकार किया है। पूंजीगत व्यय 11.2 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रुपये करने का निर्णय विकास की रफ्तार को नई गति देगा। सात हाईस्पीड रेल कॉरिडोर (मुंबई-पुणे, हैदराबाद-बेंगलुरु सहित) और रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा से ग्रामीण-शहरी कनेक्टिविटी मजबूत होगी। एमएसएमई क्षेत्र को पुनरुद्धार के लिए विशेष योजना तथा सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से 40,000 करोड़ का निवेश रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त करेगा। उत्तर प्रदेश में कानपुर-आगरा के चमड़ा उद्योग को फायदा, ओडीओपी को महात्मा गांधी हैंडलूम योजना से बल मिलेगा।
बस्ती जैसे क्षेत्रों में खादी-हैंडलूम को प्रोत्साहन से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी। आयकर स्लैब में राहत (4 लाख तक शून्य, 12 लाख तक करमुक्त प्रभावी) तथा टीडीएस सीमाओं में ढील से मध्यम वर्ग को सांस मिलेगी। राजकोषीय घाटा 4.3% पर नियंत्रित रखने की नीति कौटिल्य की अर्थनीति की याद दिलाती है – संतुलन और वृद्धि का समन्वय। हालांकि, कृषि आपूर्ति शृंखला और ग्रीन एनर्जी पर अधिक फोकस अपेक्षित था, फिर भी यह बजट राष्ट्रवादी विकास का खाका है। उत्तर प्रदेश को विशेष सहायता से योगी सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल को बल मिलेगा।
बजट उपरगामी अवश्य पर पूर्वांचल के लिए कोई बड़ी चीज नहीं।
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