बस्ती में पैदल चलना अपराध? - कौटिल्य का भारत

Breaking News

Home Top Ad

विज्ञापन के लिए संपर्क करें - 9415671117

Post Top Ad

रविवार, 28 दिसंबर 2025

बस्ती में पैदल चलना अपराध?

हरिओम प्रकाश,कौटिल्यकाभारत


बस्ती, उत्तरप्रदेश 

बस्ती में पैदल चलना भी अपराध? कंपनी बाग से राजकीय इंटर कॉलेज तक सड़क पर वाहन, पटरी पर कब्जा—आम आदमी बेबस


बस्ती।

क्या बस्ती जनपद दुनिया का इकलौता जिला बन चुका है, जहां जिला और मंडल मुख्यालय की सबसे महत्वपूर्ण सड़क पर पैदल चलना आम आदमी के लिए चुनौती बन गया है? कंपनी बाग से राजकीय इंटर कॉलेज तक लगभग दो किलोमीटर लंबा मार्ग आज सड़क कम और स्थायी पार्किंग स्टैंड ज्यादा नजर आता है।

हैरानी की बात यह है कि इसी मार्ग से कमिश्नर, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, एसडीएम, नगर पालिका के अधिकारी और तमाम राजनीतिक दलों के नेता रोजाना आते-जाते हैं, लेकिन किसी को यह अव्यवस्था दिखाई नहीं देती—या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

बीच सड़क पर वाहन, पटरी पर दुकानदार—पैदल यात्री कहां जाए?इस मार्ग की स्थिति यह है कि सड़क के बीचोंबीच चारपहिया और दोपहिया वाहनों की कतारें खड़ी रहती हैं। फुटपाथ/पटरी पर स्थायी और अस्थायी दुकानों का कब्जा है। पैदल चलने वाला नागरिक या तो सड़क पर वाहन के बीच चले, या जान जोखिम में डाले। सवाल यह है कि पैदल चलना क्या अब बस्ती में गैरकानूनी हो गया है?

नगर पालिका, प्रशासन या पुलिस—आखिर जिम्मेदार कौन? यह स्थिति किसी एक दिन या किसी विशेष अवसर की नहीं, बल्कि स्थायी प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।अब सवाल सीधे और स्पष्ट हैं—नगर पालिका क्यों पटरी अतिक्रमण हटाने में असफल है? एसडीएम अपने क्षेत्र में कानून व्यवस्था और यातायात सुधार क्यों नहीं कर पा रहे? पुलिस प्रशासन अवैध पार्किंग पर कार्रवाई से क्यों बचता है?

जिलाधिकारी और कप्तान की नजर इस मुख्य मार्ग पर क्यों नहीं पड़ती? या फिर यह मान लिया जाए कि कानून केवल आम आदमी के लिए है, प्रभावशाली लोगों और व्यापारिक अतिक्रमणकारियों के लिए नहीं?


व्यापार जरूरी, लेकिन सड़क और फुटपाथ की कीमत पर नहीं,यह कोई व्यापार-विरोधी सवाल नहीं है, लेकिन व्यापार के नाम पर सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा संविधान और कानून दोनों का अपमान है। फुटपाथ दुकानदारों के लिए नहीं, पैदल नागरिकों के लिए होते हैं। सड़क चलने के लिए है, पार्किंग के लिए नहीं।

अगर यही हाल रहा तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए शहर के नागरिक पूछ रहे हैं—अगर किसी दिन इस मार्ग पर बड़ा हादसा हो गया,तो क्या उसकी जिम्मेदारी,नगर पालिका लेगी?प्रशासन लेगा? पुलिस लेगी? या फिर हमेशा की तरह फाइलों में मामला दफन कर दिया जाएगा?

नागरिकों की मांग,कंपनी बाग–राजकीय इंटर कॉलेज मार्ग को नो-पार्किंग जोन घोषित किया जाए।पटरी अतिक्रमण पर तत्काल अभियान चलाया जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की उत्तरदायित्व तय हो।

पैदल चलने वाले नागरिक के संवैधानिक अधिकार की रक्षा की जाए।सीबस्ती की यह तस्वीर विकास नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का आईना है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जागते हैं या आम आदमी यूं ही सड़क पर अपनी जान जोखिम में डालता रहेगा।

इसी तरह कही टाउन क्लब भी  किसी की व्यक्तिगत जागीर फिर न हाजाय।

1 टिप्पणी:

Post Bottom Ad