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शनिवार, 1 नवंबर 2025

निर्भय स्वागत करो मृत्यु का!!

 सम्पादकीय:


यक्ष प्रश्न, विश्व का सबसे बड़ा आश्चर्य, उत्तर मृत्यु! व्यक्ति जनता है मृत्यु  अटल है फिर भी जीवन भर बचने का प्रयास भी उसी से!

मृत्यु के रहस्य और जीवन का उद्देश्यमृत्यु सृष्टि का सबसे बड़ा रहस्य है, जिसे समझने का प्रयास मानव सभ्यता के प्रारंभ से ही होता आया है। प्रस्तुत आलेख के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया है कि मृत्यु किसी जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक यात्रा का परिवर्तन है। 

भारतीय सनातन परंपरा, विशेषकर गरुड़ पुराण जैसे शास्त्र, बताते हैं कि शरीर छूटने के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार अगली यात्रा की ओर बढ़ती है। यह विचार मानव जीवन को स्थायी और उद्देश्यपूर्ण बनाता है।मनुष्य अपने जीवन में जो भी कर्म करता है, उसका सीधा प्रभाव उसकी आत्मा की आगे की यात्रा पर पड़ता है। अच्छे कर्म उसे उच्च लोकों की ओर अग्रसर करते हैं और बुरे कर्म पुनः जन्म-जन्मांतर की पीड़ा में बाँध देते हैं। 

यह एक महान मूल्यबोध है, जो समाज को नैतिकता, सेवा और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करता है।मृत्यु के बाद आत्मा कहाँ जाती है—इस प्रश्न का उत्तर खोजते समय आलेख यह संदेश भी देता है कि सच्ची मुक्ति केवल सत्कर्म, भक्ति और सही दिशा में जीवन जीने से ही संभव है। जीवन के क्षणिक सुख-दुख, सफलता-असफलता से ऊपर उठकर स्थाई शांति और ब्रह्मज्ञान की खोज ही मानवता का परम उद्देश्य होना चाहिए।

हमारे समाज में मृत्यु का भय व्याप्त करना, आत्मा की अमरता और कर्मों की महत्ता को नकारना, व्यक्ति को भटकाव और निराशा की ओर ले जाता है। इसलिए, परंपरागत ग्रंथों के आलोक में, हमें न केवल मृत्यु के रहस्य को समझना चाहिए बल्कि जीवन को सकारात्मक, सेवा भाव और नैतिकता के रास्ते पर आगे बढ़ाना चाहिए।यही सम्पादकीय सन्देश है—मृत्यु अन्त नहीं, नवयात्रा का आरंभ है। अपने कर्मों से जीवन को सार्थक बनाइए, ताकि मृत्यु के बाद भी आत्मा को श्रेष्ठ मार्ग मिले।

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