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गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

लखनऊ के“आशियाना में रिश्तों का अंत: बेटे के हाथों पिता की हत्या ने लखनऊ को झकझोरा”

 

लखनऊ में रिश्तों का रक्तरंजित अंत: पिता की हत्या ने झकझोर दिया 

लखनऊ,
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक शांत और पॉश माने जाने वाले इलाके में घटी इस घटना ने न केवल कानून व्यवस्था बल्कि पारिवारिक रिश्तों की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 फरवरी से लापता कारोबारी मानवेंद्र प्रताप सिंह की तलाश जब खत्म हुई, तो उसके साथ एक ऐसी सच्चाई सामने आई जिसने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। पुलिस के अनुसार, 49 वर्षीय मानवेंद्र प्रताप सिंह का धड़ उनके ही घर के भीतर एक प्लास्टिक ड्रम से बरामद किया गया। शव के कई टुकड़े किए गए थे, जबकि कुछ हिस्सों को शहर के अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया गया था, ताकि पहचान और जांच को भटकाया जा सके।
जालौन के मूल निवासी मानवेंद्र सिंह पिछले कई वर्षों से लखनऊ में कारोबार कर रहे थे और स्थानीय समाज में एक स्थापित व्यापारी के रूप में जाने जाते थे। उनके अचानक गायब होने के बाद परिवार और परिचितों ने पहले इसे सामान्य गुमशुदगी माना, लेकिन समय बीतने के साथ संदेह गहराता गया।
पिता-पुत्र के विवाद से शुरू हुई त्रासदी जांच अधिकारियों के मुताबिक़, हत्या के आरोप में गिरफ्तार 21 वर्षीय अक्षत प्रताप सिंह — जो मृतक का बेटा है — ने प्रारंभिक पूछताछ में अपराध स्वीकार कर लिया है।
पुलिस उपायुक्त विक्रांत वीर ने बताया,“प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि 20 फरवरी की रात उसके और उसके पिता के बीच किसी बात को लेकर तीखा विवाद हुआ था। गुस्से में उसने अपने पिता की लाइसेंसी राइफल से गोली चला दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।”
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी ने घबराहट और पकड़े जाने के डर में शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की। इसी दौरान उसने शव के टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया।
पड़ोसियों को नहीं हुआ अंदेशा
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस घर में यह भयावह घटना हुई, वहां आसपास रहने वाले लोगों को कई दिनों तक कोई असामान्य हलचल महसूस नहीं हुई। पड़ोसियों ने बताया कि परिवार सामान्य और शांत स्वभाव का माना जाता था।एक पड़ोसी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा,“हमने कभी नहीं सोचा था कि उस घर में ऐसा कुछ हो सकता है। पिता-पुत्र को कई बार साथ देखा था।”गुमशुदगी से हत्या तक — जांच की कहानी,20 फरवरी के बाद जब मानवेंद्र सिंह का फोन बंद मिलने लगा और वह कारोबार से भी गायब रहे, तब रिश्तेदारों ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने पहले गुमशुदगी का मामला दर्ज कर कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगालना शुरू किया।जांच के दौरान पुलिस का शक घर के भीतर ही किसी घटना की ओर गया। तलाशी अभियान में घर के एक हिस्से से दुर्गंध आने पर ड्रम खोला गया, जहां से शव का धड़ बरामद हुआ। इसके बाद पूरी घटना का खुलासा हुआ।
रिश्तों की टूटती संवेदनाएँ,यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक और पारिवारिक तनावों की भी भयावह तस्वीर पेश करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली, मानसिक दबाव, पीढ़ियों के बीच संवाद की कमी और गुस्से पर नियंत्रण न होना कई बार ऐसे चरम परिणामों में बदल जाता है।
परिवार के भीतर होने वाली हिंसा अक्सर बाहर दिखाई नहीं देती, लेकिन जब वह विस्फोट करती है तो पूरे समाज को झकझोर देती है.पुलिस ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और हत्या में इस्तेमाल लाइसेंसी राइफल भी बरामद कर ली गई है। फोरेंसिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।अधिकारियों का कहना है कि घटना के हर पहलू — मानसिक स्थिति, विवाद का कारण और हत्या के बाद की गतिविधियों — की गहराई से जांच की जा रही है।
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि एक चेतावनी भी है — संवाद खत्म होने पर रिश्ते कितनी भयावह दिशा ले सकते हैं। कभी सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक रहा घर ही जब अपराध स्थल बन जाए, तो समाज को अपने भीतर झांकने की आवश्यकता होती है।

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